Sabhi Khush Rahe Rab Se Yahi Ibadat Hai Meri Best Poetry Of Shekhar Sharma

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सभी खुश रहो  रब से यही इबादत है मेरी

हँसना और हँसाना कोशिस है मेरी

हँसना और हँसाना कोशिस है मेरी

हर कोई खुश रहे यही चाहत है मेरी

भले हिं कोई शेखर को याद करे या न करे

भले हिं कोई शेखर को याद करे या न करे

हर अपने को याद करना आदत है मेरी

सभी खुश रहो  रब से यही इबादत है मेरी

जिसे मैंने दुनियाँ की हर ख़ुशी देना चाहा

जिसे मैंने दुनियाँ की हर ख़ुशी देना चाहा

उसने ही मेरी दिल पे चोट दी थी गहरी

वो बेवकूफ समझ कर लूट रही थी मुझको

वो बेवकूफ समझ कर लूट रही थी मुझको

क्यूंकि मै गाँव का था वो थी शहरी

सभी खुश रहो  रब से यही इबादत है मेरी

मुझे पता था वो धोखा दे रही थी मुझको

लेकिन फिर भी मैंने जान से ज्यादा प्यार किया उसको

यही सराफत थी मेरी

वो खिलौना समझकर खेल रही थी मुझसे

शायद खिलौने से खेलने की आदत थी उसकी

मै अब भी दुआ करता उस पगली के लिए

क्यूंकि वो सच्ची मोहबत थी मेरी

वो हमेशा खुश रहे  रब से यही इबादत है मेरी

हँसना और हँसाना कोशिस है मेरी

हँसना और हँसाना कोशिस है मेरी

हर कोई खुश रहे यही चाहत है मेरी

भले हिं कोई शेखर को याद करे या न करे

भले हिं कोई शेखर को याद करे या न करे

हर अपने को याद करना आदत है मेरी

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