Abhi To Shuruaat Ki Hai Puri Ki Poori Kitab Likhna Baaki Hai Poetry Of Shekhar Sharma

अभी तो शुरुआत की है पूरी किताब लिखना बाकी है

उठाई है कलम लिखने को आशीर्वाद मेरी माँ की है

अभी तो शुरुआत की है

अभी तो शुरुआत की है

पूरी किताब लिखना बाकी है

मै हमेशा तैयार रहता हूँ सामना करने मुश्किलों की

मै हमेशा तैयार रहता हूँ सामना करने मुश्किलों की

क्यूंकि आशीर्वाद माँ की है फिर डर किस बात की है

अभी तो शुरुआत की है पूरी किताब लिखना बाकी है

पुरे दिन मेहनत करता हूँ निन्दें खराब की मैंने रात की है

जब मैंने लिखना शुरू किया

जब मैंने लिखना शुरू किया

तो सादे पेपर और कलम ने भी मेरी साथ दी है

अभी तो शुरुआत की है

अभी तो शुरुआत की है

पूरी किताब लिखना बाकी है

वो बचपन की बातें मुझे याद आज भी है

क्यूंकि अब अकेलापन और तन्हाइयां मेरी साथी है

अभी तो शुरुआत की है

अभी तो शुरुआत की है

पूरी किताब लिखना बाकी है

लाख मुश्किलों करोड़ो अड़चन आ जाये

फिर भी शेखर कभी हार ना मानेगा

वो इसलिए की सर पे हाथ मेरी माँ की है

अभी तो शुरुआत की है

अभी तो शुरुआत की है

पूरी किताब लिखना बाकी है

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