Jo Bhool Gaye Uska Intejaar Kya Karna-Hindi Poetry By Shekhar Sharma

कभी शिकवे तो कभी गिला किया करते है
दुनिया के भीड़ में अकेले रहा करते है
मेरी जिन्दगी अब जैसे सुनसान है
मानो जैसे बिन सुपारी के पान है
अब तो तन्हाइयों के साथ है रहना
जो भूल गये उसका इंतेजार क्या करना

बंद हो गया फ़ोन आना रात में
झगड़े शुरू हो गये बात-बात में
अब दिल को क्यूं दिलाशा दिलाना
लग रहा टूट चूका है दीवाना
अब उनकी तस्वीर को क्यूँ पास रखना
जो भूल गये उसका इंतेजार क्या करना

मोहल्ला ख्वाइशों का बहुत बड़ा होता है
हँसाने वाला कम रुलाने वाला ज्यादा खड़ा होता है
बेहतर होगा की हम जरूरतों की गली में मुड़ जाये
खुद को ठण्ड कर ले इससे पहले की जल जाये
जाने वाले आयेंगे नहीं उनपर कब तक एतबार करना
जो भूल गये उसका इंतेजार क्या करना

वक़्त की टहनी पर परिंदों की तरह है लोग
उड़ जायेंगे तस्वीरों से रंगों की तरह लोग
आँखे भीगती रही चेहरे पे मुस्कान रखा मैंने
खुद से ज्यादा लोगों का ख्याल रखा मैंने
बेकार गया मेरा हर रातें ख्वाब देखना
जो भूल गये उसका इंतेजार क्या करना

लोगों के फैसले से कभी नाराज हुआ नहीं
जो चाह रब से रब ने दिया नहीं
जिससे हँसने की उम्मीद थी वो नाराज कर गये
ख़ुशी देने के वजाय दिल में दर्द दे गये
परदेशी लोगों से क्यूँ उम्मीद रखना
जो भूल गये उसका इंतेजार क्या करना

आशमान में आशियाना बनाने का अरमान था
ये उन दिनों के बात है जब मै नादान था
खुद संभलने के लिए नशा करते है
अब तो अंधेरों में रहा करते है
जली थी जो रौशनी फिर से जलेगी क्यूँ आस रखना
जो भूल गये उसका इंतेजार क्या करना

शेखर शर्मा

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