जिंदगी तुझसे खुश हूँ – Hindi poetry on life – jindgi poetry

जिंदगी तुझसे खुश हूं

बिन मांगे सब कुछ दिया तूने
रूठ गयी तो मना लिया तूने
अब अपनी नादानियों में मस्त हूँ
ये जिंदगी तुझसे खुश हूं

सारे शुकूँ के पल जी लिया
बचपन मे बस आराम किया
अब अपने कामों में व्यस्त हूँ
ये जिंदगी तुझसे खुश हूं

धीरे-धीरे सही रास्ते पे चलने लगी
माँ पापा का ख्याल भी रखने लगी
अब तो बस अच्छे ख्वाब देखती हूँ
ये जिंदगी तुझसे खुश हूं

न किसी से बातें करती थी
न किसी से दोस्ती रखती थी
अब तो दुश्मनो का भी दोस्त हूँ
ये जिंदगी तुझसे खुश हूं

डाटें खाकर उदाश होने वाली
छोटी सी बातों पर मायुष रहने वाली
अब नाहीं उदाश नाहीं मयूश हूँ
ये जिंदगी तुझसे खुश हूं

©शेखर शर्मा

Leave a Comment