बच्पन की कहानियां

बात उन दिनों की है जब मैं 5th क्लास में पढ़ता था हम चार दोस्त थे गगन, रौशन, नीलेश और मैं शेखर। हम चारों हमेशा साथ रहते थे खेत जाना हो या गाँव की गली में घूमने जाना हो या गाँव के पास पूल पर बैठ कर लौंडिया ताड़ना हो यंहा तक हमलोग शौचालय ( टट्टी ) करने भी साथ ही जाते थे। अब थोड़ा अपने साथी के बारे मे बता दे रौशन रिश्ते में मेरा भतीजा लगता था और वो थोड़ा सनकी किस्म का था हर बात में गुस्सा हमेशा मारने पीटने की बातें करता था माना जाए तो हमारे ग्रुप के सबसे खतरनाक इंसान था गगन के बारे में बता दे ये थोड़ा क़ानूनची इंसान था इसके दिमाग के अंदर कानून बनने में टाइम नही लगता है वैसे ये हम चारों में काफी टैलेंटेड बंदा था लेकिन एक बात है इसकी फटती बहुत ज्यादा है (यंहा फटने के मतलब वो नही है जो आप सोच रहे हो ) ये हम चारों में काफी डरपोक था बात करे नीलेश की तो भैया पूछो ही मत नीलेश नाम सुनते ही मुझे हंशी आने लगती है नीलेश मजकिया लड़का था इसका जोक्स पूरे इलाके में फेमस था ये रोता हुआ इंसान को अपनी जोक्स भरी बातों से हंसा देता था और ये गगन को हद से ज्यादा परेशान करता था वैसे गगन को हमलोग भी परेशान करते थे पर नीलेश कुछ ज्यादा ही था हमारे मजकिया दोस्ती से जुड़े कुछ मजकिया पल को आपलोगों के साथ शेयर करता हूं

बरसात के दिन चल रहे थे रात को खाना खाकर मैं जल्दी सोने की कोशिश कर रहा था क्यूंकि गगन, नीलेश, और रौशन कंही सुबह जाने की बात कर रहे थे मौशम सुहाना था ठंडी हवा चल रही थी तो मुझे जल्द ही नींद आ गया और मैं सो गया शायद सुबह होने ही वाली थी तभी कोई मेरे कमरे की खिड़की से मुझे आवाज लगा रहा था मेरी तो नींद खराब हो रही थी आपलोगों को पता ही होगा कि सुबह-सुबह अगर कोई उठता है तो कैसा लगता है मुझे भी गुस्सा आ रहा था तभी मेरे कानों में एक आवाज आई चाचा वो चाचा उठी ने हो चाचा मैं आवाज पहचान गया रौशन की आवाज था मैं बोला धीरे बोल धीरे मरवाएगा क्या बे फिर वो चुप होकर मेरा इंतेजार करने लगा मैं धीरे धीरे चौकी (बेड) पर से उठा और बाहर जाने लगा रौशन के पास पंहुचा तब तक गगन और नीलेश भी आ चुका था रौशन बोला चचा आप तो चपलवा पहनवे न किये है मैं दौड़-दौड़ा घर गया और चपल पहन कर आ गए फिर हम चारों चल पड़े सुबह-सुबह घूमने हमसब नदी में पानी देखने गए थे नदी में पानी को देखकर नहाने का मन कर रहा था उसी वक़्त हम चारों ने एक प्लान बनाया की आज हर हाल में नदी नहाना है जल्दी-जल्दी हमलोग घर आये और खा पीकर स्कूल जाने लगे स्कूल पहुंचते ही हमसब एक ही जगह साथ मे बैठे थे मैम आयी और हाजरी (अटेंडन्स) बनाने लगी हाजरी बनते ही मैम क्लासरूम से बाहर गयी और हमलोग अपने-अपने बस्ता (जिसमे बुक,कॉपी,पेन को रखते है) लेकर स्कूल से फरार हो गए और सीधे पंहुंचे नदी और जाते ही कपड़े खोल कर कूद पड़े ( ज्यादा सोचिये मत हमलोग चड्ढी पहनकर नाहा रहे थे) करीब चार घण्टे नहाने के बाद हमलोग घर जाने लगे अभी गाँव घुसने ही वाले थे कि अपने मोहल्ले के एक छोटा लड़का मिला और बोलने लगा आपलोग नदी नहाने गए थे घर मे जाके बोलते है और दौड़ते-दौड़ते जाकर रौशन के घर मे बता दिया अब हमलोगों की हालत पूछो ही मत डर के मारे हमारे हालात ही खराब हो गयी थी हमलोगों को घर जाने की हिम्मत ही नही हो रही थी करीब शाम के सात बजे तक हमलोग गाँव के पुल के पास बैठे रहे और फिर हिम्मत करके रौशन बोला जो होगा वो देखा जाएगा चलो घर जैसे ही हमलोग घर पहुंचे वैसे ही रौशन की पिटाई शुरू हो गयी हम नीलेश और गगन छुपकर देख कर रौशन के पिटाई पे हंस रहे थे अगले सुबह रौशन हमलोगों के पास मिलने आया तभी नीलेश ने पूछा क्या रौशन रात में मजा आ रहा था न फिर क्या नीलेश की भी पिटाई हो गयी रौशन के द्वरा अब नीलेश की पिटाई देखकर गगन को हंशी आ रहा था फिर क्या नीलेश अब गगन को पीटने लगा और फिर गगन मुझे दस मिनट लड़ने के बाद फिर हमलोग मजाक करना शुरू कर दिए और मजे की जीवन जीने लगे तो इस तरह हमारे जिंदगी के पल मजे में गुजर रही थी।

हम चारों दोस्त

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