Zindgi ka paigam-Hindi poetry By Shekhar Sharma

क्यूँ उम्मीद करे, जब कोई आएगा ही नहीं
क्यूँ तडपे, जब कोई सताएगा ही नही

ना जाने क्यूँ लोग, इन्तेजार किया करते है
जो कभी हासिल न हो, उससी से प्यार करते है

ये बाबु शोना के अलावा, और भी काम है
कुछ दिखाई नहीं देता अब, हर तरफ कोहराम है

बिन पहिये की गाड़ी, सी जिन्दगी चल रही
शिकायत नहीं है किसी से, मौसम भी बदल रही

चार लोगों के बिच में, अपना भी नाम है
दुनिया के नजरों में तो, हम भी बदनाम है

कह रही जिन्दगी, खुद को तुम संभाल लो
मंजिल को पाना ही है, अपने मन में ठान लो

इस दुनिया की भीड़ में, जो चला संभलकर
जिस ने आँख अंधे कान बहरे किये, वो दुनिया रख दी बदलकर

दुनिया से अलग करने की, हर बार मौका मिलता नहीं
किस्मत दरवाजे की, हर वक्त खुलता नहीं

फितरत है इस दुनिया की, कभी सुबह तो कभी शाम है
कभी हौशले मत खोना, यही जिन्दगी का पैगाम है

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