आज नहीं तो बेशक कल लिखूं – Hindi Romantic Poetry By Shekhar Sharma

बिन हवा लहराती है
मेरे दिल की धड़कन बढ़ाती है
जब प्यार से तुम सहलाती हो
मानों जैसे छुपे राज बताती हो
जी करे तेरी जुल्फों पर एक गजल लिखूं
आज नहीं तो बेशक कल लिखूं

न ख़तम होने वाली है समन्दर
जी करता है डूब जाऊं इसके अंदर
ये जो पलके झपकाती हो
करके घायल मुझे सताती हो
जी करे तेरी आंखो पर एक गजल लिखूं
आज नहीं तो बेशक कल लिखूं

ये जो तेरे चेहरे पर खुशी है
मानों जैसे कमल की पंखुड़ी है
जब ऐसे मुस्काती हो
मेरा सारा दर्द मिटाती हो
जी करे तेरी होंठों पे एक गजल लिखूं
आज नहीं तो बेशक कल लिखूं

Leave a Comment